व्यक्तित्व क्या है – Vyaktitva Kya Hai – व्यक्तित्व के प्रकार

प्रत्येक व्यक्ति में कुछ विशेष गुण अथवा विशेषताएं होती हो जो दूसरे व्यक्ति में नहीं होतीं। इन गुणों या विशेषताओं के कारण ही प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होता है। एक व्यक्ति के इन्ही सभी गुणों का सम्मिलित रूप ही व्यक्ति का व्यक्तित्व कहलाता है। 

व्यक्तित्व क्या है | Vyaktitva Kya Hai | व्यक्तित्व के प्रकार



किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व एक स्थिर अवस्था न होकर कई कारकों या व्यवहारों का सम्मिलित रूप है जिस पर आस-पास के परिवेश का प्रभाव पड़ता है और इसी कारण से उसमें बदलाव आ सकता है। 

प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार, क्रियाएं और गतिविधियों में उसका व्यक्तित्व झलकता है। 

व्यक्तित्व क्या है – Vyaktitva Kya Hai

Personality शब्द लैटिन भाषा के शब्द Persona से उत्पन्न हुआ है, इसका अर्थ है नकाब। प्राचीन समय में व्यक्तित्व का तात्पर्य लोगों के बाहरी गुणों से होता था| 


व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके सम्पूर्ण व्यवहार का एक दर्पण होता है। व्यक्तित्व के स्वरुप को समझाने के लिए कई वैज्ञानिको ने अलग-अलग परिभाषाएं दी है – 

गिलफोर्ड के अनुसार

व्यक्तित्व गुणों का संगठित रूप है 


मन के अनुसार

व्यक्तित्व एक व्यक्ति के व्यवहार के तरीकों, रुचियों, दृष्टिकोणों, क्षमताओं तथा योग्यताओं का सबसे विशिष्ट संगठन है। 


आलपोर्ट के अनुसार

व्यक्तित्व एक व्यक्ति के भीतर के मानसिक और  शारीरिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण के साथ व्यक्ति का अद्वितीय समायोजन निर्धारित करता है। 


व्यक्तित्व के प्रकार




मनोवैज्ञानिक दृस्टि से व्यक्तित्व का वर्गीकरण यंग ने किया था। इसका उल्लेख उन्होंने अपनी पुस्तक Psychological Types में किया था। 


यंग ने व्यक्तित्व के तीन प्रकार बताये हैं- अन्तर्मुखी व्यक्तित्व, बहिर्मुखी व्यक्तित्व और उभयमुखी व्यक्तित्व।


अन्तर्मुखी व्यक्तित्व :-

जिन व्यक्तियों का व्यवहार, आदतें तथा गुण बाह्य रूप से प्रकट नहीं होते है उनका व्यक्तित्व अन्तर्मुखी (introvert) होता है। ये व्यक्ति शांत स्वाभाव के होते है और सदा अपने में ही खोये होते है। इनकी रूचि खुद में ही होती है।
ऐसे व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित है- 
  • ऐसे लोग अक्सर कम बोलते हैं। 
  • ये लोग चिन्तन और सोच-विचार बहुत करते हैं। 
  • ये लोग अंतर्मुखी तथा एकान्तप्रिय होते हैं। 
  • प्रत्येक कार्य को सोच विचार कर करते है। 
  • ये अपने कर्तव्यों के प्रति सत्यनिष्ठ होते हैं। 
  • ये लोग अच्छे लेखक होते है परन्तु ये अच्छे वक्ता नहीं होते। 
  • ये हसीं-मजाक, निन्दा व फालतू बातचीत नहीं करते हैं। 
  • ये अध्ययनशील व् मननशील होते है। 
  • इनका व्यवहार आज्ञाकारी होता है। 
  • ये व्यक्ति शीघ्र घबराने वाले होते हैं। 
  • ये अपने feelings को अपने तक सीमित रखते हैं। 
  • ये लोग भविष्य में वैज्ञानिक, दार्शनिक, रिसर्चर या लेखक आदि बनते हैं।

 

    बहिर्मुखी व्यक्तित्व :-

    बहिर्मुखी व्यक्तित्व के व्यक्ति की रूचि बाहरी दुनिया में होती है। 
    इनकी प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं :-
    • ये लोग आशावादी होते हैं। 
    • ये लोग अहमवादी तथा अनियंत्रित भी होते हैं। 
    • ये लोग दूसरों को प्रभावित (influence) करके अपना काम आसानी से निकाल लेते हैं।
    • ये लोग चिन्ता-मुक्त होते हैं तथा इनका ध्यान आनन्दपूर्वक जीवन जीने में करना होता है 
    • ये सामाजिक जीवन में काफी रूचि लेते हैं। 
    • ये व्यावहारिक जीवन में कुशल होते हैं| 
    • इस प्रकार के व्यक्ति भविष्य में व्यापारी व राजनैतिक नेता, अभिनेता तथा खिलाड़ी आदि बनते हैं। 


      उभयमुखी व्यक्तित्व:-

      बहुत कम ही लोग इस प्रकार के होते है जो पूरी तरह अन्तर्मुखी या बहिर्मुखी हों| ज्यादातर लोग इस प्रकार के होते हैं जो दोनों के मिश्रण होते है और जीवन की आवश्यकताओं के अनुसार अपना व्यक्तित्व प्रदर्शित करते है। इस प्रकार के व्यक्तित्व वाले व्यक्ति में अन्तर्मुखी व बहिर्मुखी दोनों प्रकार के गुण पाए जाते है। 

      उभयमुखी लोग अन्तर्मुखी गुणों को भी विचार में ला सकता है और बहिर्मुखी गुणों को कार्य के रूप में भी स्थान दे सकता है। 

      जैसे कि एक व्यक्ति अच्छे लेखक के साथ-साथ अच्छा वक्ता दोनों हो सकता है। 


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