शिक्षण के सिद्धांत – Principles of Teaching – Shikshan Ke Siddhant

शिक्षण की क्रिया में मनोविज्ञान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है| कोई भी मनोविज्ञान के प्रयोग के बिना शिक्षण कार्य के लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकता है| इस विषय में कई विशेषज्ञों ने छात्रों की रूचि, क्षमता और अभिव्यक्तियों के प्रभावों का अध्ययन किया और उसी के आधार पर कई शिक्षण के सिद्धांत प्रतिपादित किये|


हम इस आर्टिकल में इन्ही सिद्धांतों की बात करेंगे| लेकिन पहले आपको ये जानना चाहिए कि शिक्षण का अंतिम उद्देश्य छात्रों को शिक्षित तथा नई चीजें सिखाना है| 


छात्रों को नई चीजें सिखाने के लिएएक सिद्धांत काफी प्रसिद्द है|इसे थार्नडाइक का प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत कहा जाता है|

शिक्षण के सिद्धांत - Principles of Teaching -  Shikshan Ke Siddhant

शिक्षण के सिद्धांत

टैवर्स के अनुसार

शिक्षण के सिद्धांत में बहुत से तार्किक वाक्यों का एक समूह होता है इसमें एक ओर शिक्षा के परिणामों वही दूसरी ओर छात्र के विशेषणों के आपस में सम्बन्धो को स्पष्ट किया जाता है|

 

ध्रुवनर के अनुसार – 

 शिक्षण के सिद्धांत उपचारात्मक होता है| 

 

शिक्षण के सिद्धांत की आवश्यकता एवं महत्व 

  • ये शिक्षण और अधिगम (Learning) के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करते है| 
  • ये सिद्धांत प्रभावशाली शिक्षण की ओर ध्यान केंद्रित करते है| 
  • इसमें अनुभव तथा पुराने तरीकों को स्थान दिया जाता है| 
  • ये शिक्षा के क्षेत्र में रिसर्च और एक्सपेरीमेंट के लिए नए आयाम प्रस्तुत करते है|

शिक्षण के सिद्धांत के प्रकार – Shikshan Ke Siddhant ke prakar

  • स्वयं करके सिखने का सिद्धांत 
  • प्रेरणा व रूचि का सिद्धांत 
  • निश्चित उद्देश्य का सिद्धांत 
  • नियोजन का सिद्धांत 
  • चुनाव एवं वैयक्तिक भिन्नता (किन्हीं भी दो व्यक्तियों के व्यक्तित्व और क्रियाओं में जो अंतर होता है) का सिद्धांत 
  • लोकतंत्रीय व्यवहार का सिद्धांत 
  • जीवन से सम्बन्ध स्थापित करने का सिद्धांत
  • आवृत्ति का सिद्धांत
  • निर्माण एवं मनोरंजन का सिद्धांत 
  • विभाजन एवं अनुभव का सिद्धांत 
  • मानसिक तैयारी का सिद्धांत 
  • स्वतंत्रता तथा सहसम्बद्धता का सिद्धांत  
  • प्रभावशाली व्यूह रचनाओं का सिद्धांत 
  • अनुकूल वातावरण तथा उचित नियंत्रण का सिद्धांत 
  • उपचारात्मक शिक्षण का सिद्धांत 
  • क्रियाओं का सिद्धांत 
  • विभक्तिकरण का सिद्धांत
 

स्वयं करके सिखने का सिद्धांत

विकास का आधार स्वक्रिया है| बालक के शरीर और मस्तिष्क को क्रियाशील बना कर ही उसे सही ढंग से सिखाया जा सकता है| 


प्रेरणा का सिद्धांत

यह बालकों में रूचि उत्पन्न करने का माध्यम है| प्रेरणा संचार होने पर बालक शीघ्र पाठ को सीखने का प्रयास करता है| 

 

रूचि का सिद्धांत

शिक्षण को स्पष्ट, सुपाच्य,पठनीय एवं रुचिपूर्ण बनाने के लिए प्रत्येक पाठ में एक लक्ष्य निर्धारित हो तभी रूचि उत्पन्न की जा सकती है| 


निश्चित उद्देश्य का सिद्धांत

मनुष्य जो भी कार्य करता है, उसका कोई ना कोई उद्देश्य अवश्य होता है। बिना उद्देश्य का कार्य सिद्ध नहीं हो सकता l ठीक इसी प्रकार शिक्षण में प्रत्येक पाठ का एक पूर्व निश्चित उद्देश्य होता है। शिक्षक को किसी पाठ को पढ़ाने से पहले उसके उद्देश्य का ज्ञान होना अति आवश्यक है|


नियोजन का सिद्धांत

एक सफल शिक्षक वो माना जाता है जो कक्षा में जाने से पहले ही यह योजना बना ले कि उसे आज क्या पढ़ाना है| शिक्षण कार्य करते समय हर शिक्षक को अपने शिक्षण की क्रमबद्ध योजना बनानी चाहिए| 


चयन का सिद्धांत

शिक्षण के लिए केवल उन्ही तथ्यों का चयन किया जाना चाहिए जो आवश्यक हैं| एक सफल शिक्षक सरल तथा कठिन विषयों को उनके कठिनता के आधार पर उनका क्रम निर्धारित करता है l और उसे छात्रों के सम्मुख प्रस्तुत करता है l

 

प्रभावशाली व्यूह रचनाओं का सिद्धांत

प्रत्येक शिक्षक को पढ़ाने से पहले काफी सावधानी से विषय के शिक्षण के लिए व्यूह रचनाओं का चयन, निर्माण और उपयोग करना चाहिए| 

 

अनुकूल वातावरण तथा उचित नियंत्रण का सिद्धांत 

यह प्रभावशाली अधिगम (learning) हेतु आवश्यक तथ्य है| एक अच्छा शिक्षक कक्षा की स्वच्छता, प्रकाश,रोशनदान की उचित व्यवस्था पर ध्यान देता है| 

 

उपचारात्मक शिक्षण का सिद्धांत

शिक्षक अपने छात्र की कमजोरियों, कमियों, तथा त्रुटियों का पता लगा कर सुधार  करता है| 

 

क्रियाओं का सिद्धांत 

फ्रोबेल के अनुसार कार्य करके सीखना learning की सर्वोच्च विधि है|

 

विभक्तिकरण का सिद्धांत 

प्रभावशाली शिक्षण के लिए विषय को कुछ भागो में बांटना चाहिए जिससे छात्रों को सभी बिंदु स्पष्ट हो सके|


शिक्षण के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत कौन से है?

शिक्षा आजकल छात्र केन्द्रित है| यह विभिन्न मनोवैज्ञानिकों की ही देन है| इसका अर्थ बालक की योग्यताओं, क्षमताओं, रुचियों, मानसिक स्तरों तथा उनकी आयु के आधार पर शिक्षा प्रदान करना है| इसके सिद्धांत निम्नलिखित है- 

  • अभिप्रेरणा एवं रूचि का सिद्धांत 
  • अभ्यास एवं रूचि का सिद्धांत 
  • तत्परता का सिद्धांत 
  • परिवर्तन,विश्राम तथा मनोरंजन का सिद्धांत
  • प्रतिपुष्टि तथ पुनर्बलन का सिद्धांत 
  • ज्ञानेन्द्रीय प्रशिक्षण का सिद्धांत 
  • स्वाधिगम का सिद्धांत 
  • समूह गतिशास्त्र का सिद्धांत 
  • स्व अभिव्यक्ति एवं सृजनात्मकता का सिद्धांत 
  • सहानुभूति का सिद्धांत 
  • सहयोग का सिद्धांत
  • उद्दीपन का सिद्धांत 
  • उपचारात्मक शिक्षण का सिद्धांत 

 

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