थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत | थार्नडाइक का प्रयास व त्रुटि का सिद्धांत

 व्यक्ति अपने जीवन में कई तरीकों से नई चीजे सीखता है| सीखने के इन तरीकों को मनोवैज्ञानिकों ने कई प्रकार से विभाजित किया है| प्रोफेसर ई. एल. थार्नडाइक ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत का प्रतिपादन किया| जिसे हम थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत या थार्नडाइक का प्रयास व त्रुटि का सिद्धांत के नाम से जानते है|

 

थार्नडाइक का जन्म 1874 में USA में हुआ था| वो कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे|  

 

थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत या थार्नडाइक का प्रयास व त्रुटि का सिद्धांत

थार्नडाइक का सीखने का सिद्धांत

इस सिद्धांत को हम थार्नडाइक का प्रयास व् त्रुटि का सिद्धांत भी कहतें है| एडवर्ड थार्नडाइक ने सिखने के इस सिद्धांत के बारे में बताया की जब व्यक्ति कोई कार्य सीखता है तो उसके सामने एक विशेष स्थिति या प्रेरणा होती है, जो उसे विशेष प्रकार की प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित करती है|

 

इस प्रकार एक विशिष्ट प्रेरणा का एक विशिष्ट प्रतिक्रिया से सम्बन्ध स्थापित हो जाता है तो उसे उद्दीपन अनुकिय्रा या Stimulus Response कहतें हैं| 

 

थार्नडाइक का प्रयोग:

थार्नडाइक एक पशु मनोवैज्ञनिक थे| इन्होने बिल्ली, चूहे, मुर्गी आदि पर कई प्रयोग किये और यह निष्कर्ष निकाला कि पशु-पक्षी व बच्चे प्रयास व भूल द्वारा सीखतें हैं| 

 

अपने एक प्रयोग में इन्होने एक भूखी बिल्ली को पिंजड़े में बंद कर दिया और पिंजड़े के बाहर उसका खाना रख दिया| बिल्ली के लिए उसका खाना उद्दीपक (प्रेरणा) था और इसके कारण उसके मन में प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई| जिसके कारण उसने पिंजड़े के बाहर आने के प्रयास करने शुरू कर दिए| 

 

उसने पिंजड़े के चारो और पंजे मारे, और घूम-घूम कर दरवाजा खोलने का प्रयास करने लगी| काफी देर में जब उसने एक तार पर पंजा मारा तब पिंजड़े का दरवाजा खुल गया| जब उसे दोबारा पिंजड़े में बंद कर दिया गया तो वह पहले से काम समय में बाहर आ गई| 

 

यही प्रक्रिया जब पांचवी बार दोहराई गई तो बिल्ली ने एक बार में ही दरवाजा खोल लिया| 

 

ठीक ऐसा ही मैक्डूगल ने अपने प्रयोगों के आधार पर बताया कि मनुष्य और पशु जितनी बार प्रयत्न करते हैं उनकी त्रुटियां उतनी ही कम होती जाती हैं| 

 

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थार्नडाइक के प्रयास व त्रुटि के सिद्धांत का शिक्षा में महत्व

थार्नडाइक का यह सिद्धांत बालकों के शिक्षण तथा उनकी बुद्धिलब्धि के विकास में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

  • इस विधि से सीखने की क्रिया सरल हो जाती है| 

  • यह सिद्धांत करके सीखने पर बल देता है, जो आज के समय में बहुत उपयोगी है| 

  • यह सिद्धांत बड़े तथा मंदबुद्धि बालकों के लिए बहुत उपयोगी है| 

  • बालक भाषा में शुद्ध उच्चारण इसी तरीके से सीखता है| 

  • अनुभव से लाभ उठाने का तरीका बालक इसी विधि से सीखता है| 

  • इस सिद्धांत से धैर्य व परिश्रम के गुणों का विकास होता है| 

  • चलना, साइकिल चलाना, गणित के प्रश्नों को हल करना, कलाकृतियां बनाना आदि सभी में इस सिद्धांत का विशेष महत्व है| 

हम अपने दैनिक जीवन के कार्यों में प्रयास व् त्रुटि के सिद्धांत का बहुत अधिक प्रयोग करतें है|

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